मेरा बॉयफ्रणड - Indian Sex Story-44

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मेरा बाय्फ्रेंड - Indian Sex Story-44
भाभी-मुझे भी आ रही है रे..तू तो मूत आराम से..

मे-चिि यार भाभी आप तो मेरे सामने मत करिए..और यहा हम दोनो मउटेंगे तो तालाब बन जायगा..

भाभी-वाऊ तब तो में उसी में नाहोँगी रोज़..मेरी शिखा की पेशाब से अच्छा पानी तो हो ही नही सकता इस दुनिया मे..

भाभी की बात सुनके मेरी चुत से पेशाब की जगह रस निकलने लगा..तो भाभी ने मुझसे कहा..

भाभी-क्या हुआ रे..निकल ना मूत अपना..

मेने भाभी को किसी च्चिनाल की तरह देखते हुए कहा..

मे-मुझे नही आ रही यार अब..

भाभी-क्यो अभी तो लगी थी रुक क्यो गई..मूत ना बेटा..

मे-पता नही भाभी..नही आ रही यार अब..

भाभी-अरे मेरी बेबी..ला में करवा देती हूँ..

और भाभी ने अपनी हथेली से मेरी पूरी चुत को कवर कर लिया और धीरे धीरे मेरी चुत को मसलते हुए ष्ह ष्ह की आवाज़ करने लगी..तो मुझे हाँसी आ गई..

मे-भाभिईिइ आप भी ना..में कोई बच्ची हूँ जो ष्ह श करने से मेरी पेशाब बाहर आ जयगी..

पर भाभी बस आवाज़ कर रही थी और मुझे कहा जाने वाली नज़रो से देख रही थी..और बार बार ऐसा करने से सच मे मेरी चुत से पेशाब आने लगा..और मेरी धार बहुत लंबी जाने लगी..पर भाभी ने हाथ नही हटाया..मेरी पेशाब उनके हाथो को गीला कर रही थी थी और थोड़ी सी देर बाद प्रेशर इतना हो गया की मेरी पेशाब सोफे को भी गीला करने लगी पर भाभी ने हाथ नही हटाया..फिर जब मेरी पेशाब और ज़्यादा होने लगी तो वो हुआ जिसका मुझे अंदाज़ा भी नही था..भाभी ने हाथ हटाया और अपने मूह को मेरी पेशाब की धार के सामने रखा..और थोड़ी देर बाद उन्होने अपना पूरा मूह मेरी चुत से चिपका दिया..मेरी पेशाब अब पूरी भाभी के मूह मे जा रही थी और वो उसे पानी की तरह आराम से पे रही थी..मुझे पेशाब इतनी तेज़ आ रही थी की मुझसे रुकते नही बना और मेने पूरी पेशाब भहाही के मूह मे ही कर दी..फिर मूतने के बाद मुझे कुछ राहत मिली..और मेने भाभी की तरफ बहुत प्यार से देखा..उनके पूरे चहरे पर मेरी पेशाब थी..पूरा फेस गीला हो चुका था उनका..मेने बिना सोचे संज़े भाभी के होंठो को चूम लिया..कुछ पेशाब मेरे मूह मे भी लगी लेकिन मेने बस चूम के वही मेरी पेशाब के ऊपर थूक दी..और अपनी जीभ को एक बार अपने होंठो से फेराते हुए फिर थूक दिया.. मेरी इस हरकत से भाभी जैसे पागल हो गई और मेरे ऊपर टूट पढ़ी..वो मेरी गांड को जोरोर से दबाते हुए मेरे होंठो को चूसने लगी किसी पागल कूटी की तरह..मेरे मूह मे पेशाब जाने लगी तो मेने भाभी से कहा..

मे-अरे भाभी पहले मूह तो धो लीजिए..च्चीी यार सारी पेशाब मेरे मूह मे जा रही है..नमकीन नमकीन लग रहा है..

भाभी-उफफफ्फ़ शिखा सेक्स और प्यार अगर एक साथ हो तो पेशाब क्या सारी चीज़े अच्छी लगती है..तेरा पसीना अगर इतना निकलता ना तो वो भी मेरा फवर्ट होता..उफ़फ्फ़ यार तुझे तो नंगी करके चोदने मे बहुत मज़ा आता है मेरी जान..तू किसी रानी से कम नही है..

मे-आआहह यार भाभी प्लीज़ आज मत काटिए..कल जाना है मुझे और आप तो ऐसा कर रही है जैसे में कोई लड़का हूँ यार..

भाभी-आस शिखा बेटा तू लड़का होती ना तो और पागल हो जाती में..

मे-आहह ष्ह अरे उफ़फ्फ़ क्या मतलब भाभी..क्य्ाआ.आहह..क्या कराती आप..

भाभी-पहले तो बेटा में तेरे मोटे लॅंड को मेरे मूह मे लेकर घंटो चुस्ती ही रहती..और तेरे लॅंड को काट काट के लाल कर देती..

मे-उफफफ्फ़ भाभी आप तो पागल हो सच मीई.आअहह छूसीए ना रुक क्यो जाती है आप..मेरी चुत को कस कस के छातिए और छूसीए..लाल कर दीजिए यार काट काट के,,प्लीज़..और मेरे पास लॅंड नही है तो क्या हुआ भाभी..आअहह आप प्लीज़ मेरी गांड मे आज उंगली डालिए..प्लीज़ सबाहुत मन कर रहा है भाभी..आअहह

और भाभी ने जल्दी से मुझे पलताया और मेरी गांड के छेद को चातने लगी..में पागल हुए जा रही थी..और अपनी गांड को उच्छा उच्छल के भाभी की जीभ को अंदर लिए जा रही थी..भाभी की जीभ मेरी गांड के छेद मे जाने मे अलग ही मज़ा आ रहा था जैसे में कोई सपना देख रही हूँ..तभी भाभी ने अपनी एक उंगली निकली और मेरे छेद मे डाल दी..उफफफफफ्फ़ मेने बहुत ज़ोर से च्चिलाया आआआआअहह भाभिईीईई प्लीज़ निकालिए जल्दी प्लीज़..पर उन्होने नही निकली और में च्चिलाती रही और वो बार बार उंगली अंदर बाहर कराती गई..और थोड़ी देर बाद मेरा दर्द मज़े मे बदल गया..उफ़फ्फ़ वो किसी सपने की तरह लग रहा था..इतना मुझे कभी नही आया..भाभी कभी मापनी जीभ को मेरी गांड के छेद मे डालती तो कभी अपनी उंगली और कभी मेरी गांड मे थूक देती और फिर उसे भी चातने लगती..वो पागलो की तरह मेरे पूरे बदन को चाट रही थी..और फिर मेने भी भाभी की चुत का पानी पिया..और उसे चाहता..ऐसे ही रात भर हमारे सेक्स का बहुत चला..और कब आँख लग गई पता ही नही चला..
और सुबह करीब 11 बजे मेरी नींद खुली..मेरा सर बहुत ही भारी लग रहा था और मेरे बदन पर एक भी कपड़ा नही था..और चारो तरफ पेशाब के दाग लग गये थे जो रात मे बहुत ही जोश दिला रहे थे..मेरे ब्रेस्ट पर भी बहुत चिपचिपे दाग थे शायद वो भाभी की चुत से निकला पानी होगा..और थूक भी जो की बहुत ज़्यादा मात्रा मे थी..खैर कुछ भी हो..शरीर मे एक अजीब सी एनर्जी थी और मन बहुत ही खुश था..में उठी और अपने कपड़े देखने लगी..पर वो कही भी नज़र नही आ रहे थे..मुझे पता नही क्यो पर शर्म आ रही थी आज नंगी खड़ी होने मे..शायद आज घर जाना था ना इसलिए.मेने भाभी को आवाज़ लगाई..

मे-भ्ाआभिईीईईईईईई..

पर मुझे कोई रेस्पोन्स नही मिला..तो मेने चादर से अपने नंगे बदन को धाक लिया..और दरवाजा खोल के बाहर आ गई..पर वाहा भी एक दम शांति थी..तो मेने किचन मे जाके देखा पर वाहा भी कोई नही था..मुझे कुछ समाज़ मे नही आ रहा था की भाभी कहा चली गई..तभी बेल बाजी..में चौक गई एक दम से..में जल्दी से अपने रूम की तरफ भागी..फिर बेल बार बार बजने लगी..तो मेने हिम्मत करके दूर के होल मे से देखा..तो वाहा भाभी खड़ी हुई थी.उफफफ्फ़ तब कही जाके मुझे चैन मिला..मेने जल्दी से दरवाजा खोला और कहा..

मे-वॉट भाभी..कहा चली गई थी आप यार.

और मेने भाभी के अंदर आते ही दरवाजा फिर से बंद किया..

भाभी-अरे तू सो रही थी सो बताया नही..वो आज आंटी आने वाली है इसलिए थोड़ा समान लेने गई थी..

मे-आस पर आंटी जी कब तक आयंगी..

भाभी-वो तो रात तक आयंगी..

और भाभी ने मुझे दीवार से टीका के एक जोरदार किस किया मेरे होंठो पर..और कहा

भाभी-शिखा में तुझे बहुत मिस करूँगी यार..

मेने अपने होंठो को पोछा जो की भाभी के पसीने से गीले हो गये थे..और कहा..

मे-आस भाभी यार मत कहिए..मुझे भी बहुत ही याद आयगी आपकी..

और भाभी अंदर जाने लगी..और सोफे पर बेठ कर बेग मे से एक पॅकेट निकल के मुझे दिया..

मे-ये क्या है..

भाभी-खुद ही देख ले..

मेने जल्दी से उसे खोला तो एक और पॅकेट था..फिर मेने उसे जैसे ही खोला मेरे होश उध गये क्योकि उसमे एक रबर का नकली लॅंड था जो हूँ-भी-हूँ किसी मर्द के लॅंड की तरह सॉफ्ट और हार्ड दोनो था..वो सच मे कमाल का लग रहा था..में उसे ही देख रही थी तभी भाभी ने मुझसे कहा..

भाभी-क्या हुआ जान..रहूल की याद आ गई क्या..हाहाहा

में भाभी को देखने लगी..सच मे वो मुझे कमाल का गिफ्ट लगा..पर मेने कहा..

मे-ऊफ़्फूओ भाभी..क्या है ये..में नही ले जा सकती इसे..

भाभी-शिखा.तुझे पसंद आया की नही..???

में थोड़ी देर चुप रही..

भाभी-बोल ना..

मे-हां..भाभी.पसंद तो आया..लेकिन यार इसे में ले के नही जा सकती..

भाभी-क्यो यार.

मे-भाभी घर मे सब रहते है कैसे ले जाउंगी..

भाभी-अरे बेटा इसके लिए भी एक आइडिया है मेरे पास..ई नो कोई भी लड़की इसे कैसे रख सकती है घर मे..

तभी भाभी ने बेग मे से एक नकली पानी का जहाज़ निकाला..जिसमे टाइटॅनिक लिखा था..वो पूरा स्टील का बना था और बहुत महनगा लग रहा था..सच मे जिसने भी उसे बनाया था बड़ी ही खूबसूराती से बनाया था..वो एक ब्यूटिफुल स्माल शिप थी..जो मुझे शायद लॅंड से भी अच्छी लगी..

भाभी-ले इसमके रखना इसे..

में भाभी को देखने लगी की वो करना क्या चाहती है..उन्होने मेरे हाथ से वो नकली लॅंड लिया और उस जहाज़ को आधा खोला..वो जहाज़ बड़ी ही सफाई से खुला था और भाभी ने उसमे लॅंड को रखा और उसे फिर से बंद कर दिया..और मुझे दिया..

भाभी-इसमे तो रख सकती है ना..

मेने भाभी की तरफ देखा और मुस्कुरा के कहा..

मे-यू अरे ग्रेट भाभी..

अब मुझे बहुत खुशी हो रही थी की क्योकि अब में उस लॅंड को घर ले जा सकती थी..उफ़फ्फ़ यार अब सच काहु तो वो लॅंड बहुत ही सुंदर था..कस लड़को के भी ऐसे ही लॅंड होते..किटा सॉफ्ट था वो..हाथ मे लेते ही लग रहा था की अभी इसे अपनी चुत मे डाल लू..और उस नकली लॅंड का सोच के ही मेरी चुत गीली होने लगी थी..और शर्म भी आ रही थी की में कितनी बिगड़ गई हूँ यहा आके..पर मेने सोचा की इट्स ओके क्योकि में थोड़ी ना कोई लड़के का लॅंड ले रही हूँ..या रहूल के साथ चीट कर रही हूँ..फिर में अपने ख़यालो से बाहर निकली और भाभी से कहा..

मे-लेकिन भाभी आप इतना परेशन क्यो हुई..

भाभी-क्योकि बेटा मुझे पता है की यही एक चीज़ है जो रोज़ तू इस्तेमाल करेगी और तुझे मेरी याद आयगी..की भाभी ने दिया था..तू मुझे याद तो करेगी ना शिखा..

मे-हां भाभी..आप तो मुझे रोज़ याद आओगी..(मेने लॅंड को दबा के कहा..)




और भाभी ने उठके मुझे बहुत प्यार से गले लगा लिया और मेरे गालो पर और मेरे होंठो पर और गर्दन पर बहुत से किस करने लगी..वो पागलो की तरह किस कर रही थी..और मेने अपने हाथ से लॅंड को ज़ोर से दबाया और अपने मूह पास लाने की कोशिश करने लगी लेकिन भाभी के किस इतने ज़्यादा थे की में ये नही कर पाई..और में जोश मे आ गई..और मेने भाभी के ब्रेस्ट को दबाना स्टार्ट कर दिया..में इतने ज़ोर से दबाने लगी थी की भाभी की अया निकल गई..उन्होने कहा की बेटा धीरे दबा..और मेने उसनकी बात को अनसुना कर दिया और उनकी चुचियो को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी..अब वो पागलो की तरह मुझे किस कर रही थी..मेरे होंठो को चूस रही थी..और तभी फोन की रिंग बाजी..और मेरा ध्यान हटा..में भाभी से अलग हुई और फोन उठाया..वो एरपोर्ट से था..उन्होने कहा की आपका फ्लाइट टाइम ये है और आपकी टिकेट कॉनफरम हो गई है..अकटुली ये सुविधा सिर्फ़ एर इंडिया मे ही है..सो मेने जल्दी से टाइम देखा..मेरे पास 2 घंटे थे..सो मेने भाभी के होंठ पर एक किस किया और कहा..

मे-हम सो भाभी अब मुझे तैयार होना है..2 घंटे बाद फ्लाइट है..

और में अपने रूम मे चली गई..और मेने बिना देरी किए जल्दी से जाके नहा ली और ब्रश वगेरह भी कर लिया..और तैयार होके आ गई बाहर..भाभी भी तैयार ही थी..मुझे जल्दी छोडने के लिए उन्होने टॅक्सी भी माँगा ली थी..सो हम जल्दी जल्दी एरपोर्ट पहुचे और फ्लाइट का टाइम हो गया था तो में भाभी से बात ही नही कर पाई..और बस उन्होने कहा की फोन उठा लेना मेरी मा..और में हंस दी..वो में किसी का फोन नही अत्तनड कराती हूँ इसलिए भाभी ने ऐसा कहा..और में जल्दी से फ्लाइट मे बेठी और करीब 1.30 घंटे मे इंदूरे आ गई..और वाहा कार आ ही गई थी सो उसमे बेठ कर में आ गई अपने घर..उफफफफफफ्फ़ अपना घर अपना ही होता है..और में आंटी से मिल के अपने रूम मे गई और सबसे पहले उस शिप को अच्छे से रख दिया और बाकी समान भी वही पटक दिया और लेट गई अपने बिस्तर पर..लगता है इस बार गर्मी की च्छुतियो ने मुझे बहुत ज़्यादा बदल दिया है..फिर मेने जल्दी से रहूल को मेसेज कर दिया की में आ गई हूँ..उसका रिप्लाइ आया की आस मेरी जाआअँ,,सच मे बहुत दिन हो गये अब जल्दी से मिलने का टाइम बता देना.और मेने मेसेज किया हां ओके बेटा लेकिन अभी तो आराम कर रही हूँ..उसका रिप्लाइ आया हां जान ओके..और मेने मोबाइल को साइड मे रख दिया..और सो गई में..

फिर करीब 2 बजे मेरी नींद खुली..दिन का समय था..और मुझे अब थोड़ा फ्रेश लग रहा था..ऐसा लग रहा था जैसे की कोई सपना देखा हो मेने..बहुत ही गंदा और नंगा सपना..पर नही..उस जहाज़ को देख कर मुझे हाँसी आ गई और में उठ के बेठ गई..और मेने रहूल को कॉल किया..

मे-हम कहा हो..

रहूल-बस जान जहा भी हूँ बहुत खुश हूँ..मेरा बच्चा आ गया ना वापस..

मे-हां बेटा..बस 2 दिन बाद कालेज स्टार्ट हो रहे है फिर मिलते है..

रहूल-ओके जान..सच मे लॅंड टूट जायगा मेरा..तेरे बड़े मे सोच सोच कर..

मे-पागल हो तुम तो..ओके बाबा मिलते है..चलो रखो अब..मुझे चाय पीनी है..

रहूल-ओके मेरी जान..

और मेने फोन कटा..फिर उठी और चाय बना के पे ली..ऐसे ही 2 दिन निकल गये और फिर सुबह हुई..में बहुत खुश थी..आज इतने महीनो बाद रहूल से जो मिलना था..उफ़फ्फ़ यार..वो जिस पागलपन से मेरे बूब्स को दबाता है उसे कातने लगता है..जैसे कोई कुत्ता उसकी कुट्टी को चोदता है..बस वही पागलपन है रहूल मे..बस यही सोचते सोचते में जल्दी से नहा ली..और आज मेने अपने चुत के हल्के हल्के बालो पर भी पर्फ्यूम लगाया था क्योकि रहूल को मेरे बगल और चुत के बालो से बेहद ज़्यादा प्यार है..वो बार बार कहता है की तू तेरे बगल के बालो को मत कटवाया कर..पर में नही मानती क्योकि यार जब स्लीवलेशस टॉप पहनो तब वो बाल बिल्कुल नही अच्छे लगते मुझे..ई नो की लड़के पागल हो जाते है पर मुझे शायद नही पसंद..फिर मेने द.ओ. आने बगल मे लगाया और निकला गई कालेज के लिए..हम 1.30 बजे मिलने वाले थे इसलिए मुझे कालेज के 2 क्लासस अत्तनड करनी थी..सो में सीधे कालेज गई..आज पहला दिन था..अगर रहूल नही होता ना में कभी आज के दिन नही आती कालेज..मुझे वैसे भी कालेज ज़्यादा पसंद नही है..सारे लड़के बस मुझे घूराते ही रहते है जैसे की में कोई चलती फिराती दुकान हूँ..क्या पता क्या मज़ा आता है उन्हे..तभी में क्लास के अंदर गई..और बेठ गई..सर भी बस टीमेपास कर रहे थे..और पहली क्लास उसी की थी जो मुझे बिल्कुल भी पसंद नही था..साला हर वक़्त बस मेरे ऊपर ही नज़र लगाए रखता था..तभी वो हुआ जिससे मुझे छिड़ है..

सर-शिखा..भाई क्या बात है..खोई खोई हो..कहा ध्यान है..

मे-वो सर.वो कुछ नही..बस बेठी थी..

सर-चलो बताओ क्या किया तुमने हॉलिडेज़ मे..

तभी एक लड़के ने कहा..

लड़का-सर जहा भी गई होगी शिखा वाहा बहुत को मर दिया होगा..

और सारी क्लास हँसने लगी..तभी सर ने कहा..

सर-तुमसे किसी ने पूछा..चुपचाप बेठे रहो..हां शिखा बोलो कहा गई थी..

मे-सर में मुंबई गई थी..

तभी एक लड़के ने कहा..

1सतालाड़का-सर हेरोइन बनने गई होगी..(सब हाने लगे)

2ण्ड्लाड़का-अरे यार शिखा के लिए तो मुंबई ही यहा आ जाए..(फिर से सब छूतिए हँसने लगे)

मुझे गुस्सा आ गया..

मे-सर आप इन्हे चुप कारवाओगे या में कार्ओौ..

सर ने मेरी तरफ देखा और चिल्ला के कहा..

सर-अगर अब किसी ने बात्तमीज़ी की तो उसे बाहर कर दूँगा..साल भर के लिए..संज़े..

फिर सर ने मेरी तरफ देखा..फिर से वही चुद़दकड़ नज़रो से..वो बार बार मेरे बूब्स को देखते थे..और फीओर मेरी आँखो मे..अगर प्रॅक्टिकल के नंबर्स की चिंता नही होती ना तो सर को सबके सामने जवाब देती की क्या इसे कहा जाओगे सर..
खैर ऐसे ही सबकी हवस भारी नज़रो से बच के मेरी क्लास ख़त्म हुई..रहूल का मेसेज आया की वो बाहर ही खड़ा है..सो मेने जल्दी जल्दियपना बेग उठाया और बाहर आ गई..वाहा रहूल अपनी कार लेके खड़ा हुआ था..मेने जल्दी से सड़क करॉस की और दरवाजा खोल के बेठ गई अंदर..उसने मेरे होंठो पर किस किया और कहा..

रहूल-आस मेरी जान..कितना मर रहा था में तुझे देखने के लिए..उफ़फ्फ़ मर डालेगी तू..

मे-हां ना बेटा अब आ तो गई हूँ ना..जी भर के देखना मुझे..पर यहा से चलो..

रहूल ने मेरी तरफ देखा और कार स्टार्ट कर के चल दिया..वो कार चलते चलते मेरी ही तरफ देखे जा रहा था..मेने उससे कहा..

मे-राआहुउल्ल्ल..पागलपन मत करो प्लीज़..आगे देखो..

रहूल-यार बेटा तेरे दूध तो बहुत बड़े हो गये यार पहले से..

मे-राआहुल पागल..क्या है ये..दूध..कहा से सीखते हो ये वर्ड..

रहूल-हाहः अब इन्हे तो दूध ही कहना पढ़ेगा ना..देख तो कितने बड़े हो गये है..पूरे 4 लिट दूध आ जायगा इनमे..

मे-चुत उप रहूल..तुम ना..

रहूल-क्या में ना..2 महीने मे इतने बड़े हो गये की मन कराता है कहा जाओ..

मे-हाहाहा ओककक मेरी जान..तुम्हारे ही तो है..कहा जाना पर अभी आगे देख के चलाओ गाड़ी..

मेने भाभी के साथ जो भी किया हो लेकिन रहूल के सामने मुझे बहुत शर्म आती थी..और में उससे इतना प्यार कराती थी की वो मेरे सामने आ गया तो में सब भूल जाती थी..फिर वो बस ऐसे ही बार बार मेरे दूध ई मीन मेरे ब्रेस्ट को देखता रहा और हम आ गये माल मे..

मे-यहा क्या करना है..

रहूल-पहले कुछ कहा लेते है बेटा..मेरी बेटू ने कुछ खाया नही होगा ना सुबह से..

मे-हां यार..भुख तो लग रही है..ओके चलो..

और हमने कार पार्क की और आ गये अंदर..और बेठ गये..उसने जा के ऑर्डर दे दिया और वो भी आ गया..वो आके बेठा और मुझे फिर से घूर्ने लगा..

मे-रहूल्ल्ल्ल्ल.कुछ बोलॉगे भी..

रहूल-तू इतनी सेक्सी क्यो है यार..देख कितना कमजोर कर दिया है मुझे..

मेने उसकी बात सुनके इधर उधर देखा और उससे कहा..

मे-चुत उप रहूल..थोड़ा धीरे बोलो यार..कोई सुन लेगा तो बस..

रहूल-अरे सुन ले तो सुन ले..अच्छा शिखा एक बात बता की तूने किया क्या वाहा पर ऐसा जो इतनी सुंदर लग रही है

मे-तुम तो रहने दो..वैसी ही तो लग रही हूँ..

रहूल-नही यार..तेरे दूध बड़े दिख रहे है..

रहूल बार बार मेरे ब्रेस्ट को दूध कह रहा था तो मुझे पता नही कैसा लग रहा था मेरी चुत भी शायद गीली हो रही थी..पर वो मेरे लिए इतना प्यार पता नही कहा से लाता था जो मुझे भी पागल कर जाता था..

मे-ऊफ़्फूओ रहूल.चुप करो..

वो मुझे आज अजीब तरह से देख रहा था..मुझे अजीब तो लगा था लेकिन मेने सोचा शायद बहुत दिन बाद मिला है इसलिए ऐसा कर रहा है..

और फिर हमने खाना खाया और फिर उसने मुझसे कहा..

रहूल-चल आज कुछ शॉपिंग कर ले..बहुत दिन हो गये मेरी जान ने कुछ नही खड़ीदा..

मे-नही बेटा मुझे कुछ नही खड़ीदना..रहने दो..

रहूल-अरे जान तो क्या दिन भर इस कालेज ड्रेस मे घूमेगी तू..

मे-तो क्या प्रोबलमए है..

रहूल-मुझे तो नही पर शायद तेरे इन दूध को प्रोबलमए हो रही है..चल यार इन्हे दिखा सबको..इतने बड़े जो कर लिए है..

वो हंस के बोल रहा था पर मुझे सच मे आज कुछ अजीब लग रहा था..वो चाहता क्या था मुझसे..पर में जानती थी की रहूल मुझसे इस दुनिया मे सबसे ज़्यादा प्यार कराता है सो मुझे बस अजीब लग रहा था लेकिन डर ज़रा सा भी नही..सो मेने कहा..

मे-ओकककक रहूल..अब ज़रा ये दूध बोलना बंद करोगे..

रहूल-हहहे हां ओके अब चल..
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